Covid-19 and its impact upon the civil Society
कोरोना की दूसरी लहर और "कोविड- अधिवक्ता सहायता समूह के प्रयास"
कोविड-19 एक महामारी तो है ही जिससे जीवन को क्षति बड़े पैमाने पर हुई है पर साथ ही इस आपदा ने समाज में आर्थिक, सामाजिक, व्यावसायिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को भी बहुत अधिक प्रभावित किया है। इसके प्रकोप से पीड़ित व्यक्ति को शारीरिक वेदना असीमित हुई है, जिसके कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई और बड़ी सँख्या में लोग अभी भी इलाज करवा रहे हैं। इस समय भी बहुत से लोग कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन करके इस संक्रमण से निजात पाने के लिए प्रयासरत हैं। गत वर्ष कोरोना महामारी की पहली वेब आई थी और तमाम प्रयासों, सावधानियों एवं दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते इस पर नियंत्रण भी पा लिया गया था पर अप्रैल के पहले सप्ताह में कोरोना की दूसरी वेब जिस तरह से एकाएक तेजी से फैली वह बहुत ही चिंताजनक रही। यही नहीं इस बार 15 अप्रैल तक कोरोना संक्रमण अपने उच्च स्तर पर पहुंच गया। ऐसे में मेडिकल इन्फ्राइस्ट्रक्चर पूरी तरह से चरमरा गया या फिर यूँ कहें कि बैठ गया तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि संक्रमण की दर इतनी तेजी से बढ़ रही थी कि डिमांड और सप्लाई की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। हम अगर लखनऊ शहर की बात करें तो 15-16 अप्रैल तक अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी से लोग काफी हैरान और परेशान हो गये थे। संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा था कि आसपास मित्र रिश्तेदार एवं हर ओर से कोरोना संक्रमण से सभी लोग परेशान हो गये थे।
एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहूँगा कि मैं स्वयं भी 10 अप्रैल को कोविड- पॉजिटिव हो गया था और मेडिकल टीम की हिदायत के अनुसार घर पर ही सेल्फ कोरोंटाईन होकर कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहा था। इस दौरान मुझे अखबार और टेलीविजन की खबरों से तो कोरोना संक्रमण के बढ़ने एवं उससे होने वाली समस्याओं की जानकारी मिल ही रही थी साथ ही साथ सोशल मीडिया फेसबुक पर भी एक्टिव रहने के कारण संक्रमण की तीव्रता का पूरा एहसास था और साथ ही साथ मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का भय भी मन में सताने लगा था। ऐसे में दो तरह की समस्याएं एक साथ उत्पन्न हो रही थी, पहला यह कि संक्रमण के बाद इलाज की समस्या और दूसरा यह कि इस महामारी के संक्रमण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के कारण मन में होने वाली घबराहट तथा चिंता, व्यक्ति के अंदर लड़ने की हिम्मत और इच्छाशक्ति दोनों को कम कर रही थी।
इसी दौरान पिछले महीने 20 अप्रैल को फेसबुक पर हमारे साथी अधिवक्ता श्री देवेंद्र प्रताप उपाध्याय जी को साँस लेने में दिक्कत होने की खबर फेसबुक पर दिखाई दिया, जिसको मैंने फेसबुक के साथ व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर करके कुछ मित्रों को फोन करके सूचित किया तथा श्री उपाध्याय जी से स्वयं फोन करके बात की ती यह पता चला उन्हें साँस लेने में काफी परेशानी हो रही है, उनका ऑक्सीजन लेबल भी बहुत कम हो गया है। चूँकि इसी दौरान काफी लोगों को इस बात की खबर हो गई थी इसलिये सभी ने अपना प्रयास किया और श्री उपाध्याय को साँस सम्बन्धित व्यायाम तथा अन्य उपाय बताए गए एवं उनको परेशान ना होने तथा हम सभी साथ हैं ऐसा विश्वास और एहसास दिलाया गया। इसका बहुत ही आशातीत बल्कि यूँ कहें चमत्कारिक प्रभाव देखने को मिला और श्री उपाध्याय जी का ऑक्सीजन लेबल भी बढ़ गया। इससे उनको मानसिक बल मिला जिससे उनकी घबराहट भी कम हुई। उन्होंने सुबह जाकर डॉक्टर को दिखाया। जिस समय श्री उपाध्याय जी के लिए हम लोग प्रयास कर रहे थे उसी समय मेरे मन में आया कि कोरोना महामारी की जब इतनी विकट समस्या है कि मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तक चरमरा गया है तो फिर इस समय इस महामारी से लड़ने का एक ही उपाय है कि हम सब एक दूसरे के साथ सहयोग करके साथ खड़े होकर मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत कर सकते हैं,। तथा कोविड से पीड़ित व्यक्ति को कई प्रकार से मदद करके उसे ठीक होने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इसलिए मैंने अपने मित्र भाई जो कि ग्रुप एडमिन भी हैं को साथ लेकर उसी दिन "कोविड- अधिवक्ता सहायता समूह" के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अपने अधिवक्ता भाइयों मित्रों, कुछ चिकित्सकों और कुछ समाजसेवियों को जोड़ा और हम उसी दिन से सभी लोगों की विशेषकर कोविड पीड़ितों की समस्याएं सुनने और उसका समाधान ढूँढने में लग गए। हम लोगों को जैसे ही किसी भाई बहन की समस्या का पता चलता तो तुरंत ग्रुप में शेयर करने लगे और फिर एक दूसरे को शेयर करके समाधान ढूंढने लगे। कोविड-अधिवक्ता सहायता समूह के कार्य का समय निश्चित नहीं था क्योंकि कब कोई आपातकाल मैसेज आ जाये यह पता नहीं होता था। इस प्रकार 20 अप्रैल से 4 मई के बीच जब कोरोना संक्रमण अपने ठीक पर था तो 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराया गया। इसके लिये जो एक्टिव सदस्य हैं उनको यह सूचित किया गया था कि किसी भी समय काॅल या मैसेज आने पर उस पर तुरन्त संज्ञान लिया जाये। इसका परिणाम यह हुआ कि जो भाई बहन कोविड संक्रमण की भयावहता से परेशान थे, उनके मन में आशा की एक किरण दिखाई पड़ने लगी। हम लोग अधिवक्ता भाइयों और बहनों की सेवा करके न केवल मेडिकल संबंधी राहत बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी सहयोग करते रहे, जिससे लोगों में संक्रमण से लड़ने की हिम्मत के साथ साथ मन में होने वाले अवसाद और घबराहट समाप्त करने में भी मदद मिली।
इस दौरान कार्य करते हुए हम लोगों को एक तरफ जहाँ अपने भाइयों और बहनों को मदद करके उत्साह की अनुभूति हो रही थी वहीं कुछ अपनों से दूर होने का गम भी मिला। कुल मिलाकर यह जरूर समझ में आ गया की "संघे शक्ति" और "सेवा ही धर्म" का प्रयोग हमें हमेशा ही संभल देता है। वैसे तो हम लोगों ने इस ग्रुप में कार्य करते हुए सैकड़ों लोगों तक अपनी पहुँच बनाई और उन्हें स्वस्थ होने में सहायक सिद्ध हुए पर सभी का कर विवरण दिया जाना संभव ही नहीं है और आवश्यकता भी नहीं है पर वरिष्ठ और वयोवृद्ध श्री एक्स एम माथुर जी, रंजना अग्निहोत्री जी, अनिल पांडेय जी, श्रवण कुमार जी और राजेश पाण्डेय जी का कोविड से स्वस्थ होकर घर आना सबसे अधिक सुखद अनुभव रहा। यह बात और है कि कुछ कष्ट दाई और मन को दुखी कर देने वाले भी अनुभव मिले उनमें विशेष करके ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की कालाबाजारी तथा प्राइवेट हॉस्पिटल द्वारा मनमानी बिल देकर लोगों को आर्थिक रूप से गंभीर दबाव जैसी बातें जो मन को अशांत ही नहीं क्रोध भी उत्पन्न करती हैं। परंतु अगर हम सब अपने सामाजिक ढांचे को इतना मजबूत कर लें के यदि कोई भी आपदा कोई भी समस्या आती है तो हमें घबराना नहीं है और उसका डटकर मुकाबला करना है तो कोई भी समस्या हमें परेशान नहीं कर पायेगी, ऐसा हम तभी कर पाएंगे जब खुद को स्वस्थ रखेंगे और अपने परिवार, मित्र रिश्तेदार एवं अन्य किसी भी जरूरतमंद की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। क्योंकि अकेलापन खुद को तो काटता ही है, दूसरों के लिए एक हाथ जो मदद के लिए आगे बढ़ सकता था वह भी बेकार हो जाता है। इसलिए हम सभी को चाहिए कि अपने अपने व्यक्तिगत कार्यों, व्यवसाय, नौकरी के साथ-साथ समाज में एक दूसरे के सहयोग के लिए लिए भावना हमेशा बनाए रखना होगा वरना एक मजबूत मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर भी हमें गंभीर समस्या और कोरोना से भयानक महामारी से लड़ने में ज्यादा कारगर साबित नहीं होगा। आप सभी की जानकारी के लिए यह बताते चलते हैं कि "कोविड- अधिवक्ता सहायता समूह" पूर्व की भाँति आगे भी अपने अधिवक्ता भाईयों और बहनों की सेवा के लिये अग्रसर रहेगा।
परमानन्द शर्मा
एडवोकेट
हाईकोर्ट
25.05.2021.
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